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स्वच्छता के दावों पर सवाल: फतेहगंज में कूड़े का अंबार, शौचालय बना गंदगी का घर

बांदा जिले के फतेहगंज क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई — सार्वजनिक शौचालय में भरा गंदा पानी, बाहर कूड़े का पहाड़, ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी खामोश

  • *स्वच्छ भारत के दावों की पोल खुली: फतेहगंज में कूड़े का अंबार और शौचालय बना गंदगी का अड्डा”*

*बांदा (फतेहगंज) से रिपोर्ट:*

एक ओर सरकार गांव-गांव स्वच्छता अभियान और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बांदा जिले के फतेहगंज क्षेत्र में हालात इतने बदहाल हैं कि सार्वजनिक शौचालय गंदगी और बदबू का पर्याय बन चुका है, जबकि परिसर के बाहर कूड़े का पहाड़ खड़ा है।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि शौचालय के अंदर गंदा पानी भरा हुआ है, दीवारें दागदार हैं और सफाई का नामोनिशान नहीं है। बाहर चारों ओर प्लास्टिक, कचरा और सड़ता हुआ अपशिष्ट फैला पड़ा है। यह हाल तब है जब स्वच्छता के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो नियमित सफाई कराई जा रही है और न ही कूड़ा उठान की कोई व्यवस्था है। सवाल यह उठता है कि जब कागजों में सब “चमकदार” है तो जमीनी स्तर पर यह बदबूदार सच क्यों नजर आ रहा है?

सरकार “स्वच्छ भारत” का नारा बुलंद करती है, लेकिन फतेहगंज की तस्वीरें पूछ रही हैं — क्या यही है विकास? क्या जिम्मेदारों की आंखें सिर्फ रिपोर्ट और फाइलों तक सीमित हैं?

जब प्रधान और संबंधित अधिकारी गांव की बुनियादी जरूरत — साफ-सफाई — तक सुनिश्चित नहीं कर पा रहे, तो बाकी विकास कार्यों का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

अब देखना यह है कि जिम्मेदार महकमा जागता है या फिर ये तस्वीरें भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दफन हो जाएंगी।

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