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बिना नोटिस बिजली कटौती, BPL उपभोक्ताओं से अवैध वसूली का आरोप — क्या कानून से ऊपर है बिजली विभाग?

गरीब होना गुनाह? BPL परिवार की लाइट काटी, बोले लाइनमैन— “पैसा दो, नहीं तो अंधेरे में रहो”

रिपोर्ट: दमदार टीवी न्यूज़ लाइव 24×7 | बांदा (फतेहगंज)

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के कुछ लाइनमैनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं पर गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले उपभोक्ताओं से अवैध वसूली और बिना पूर्व सूचना बिजली काटने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह मामला बांदा जिले के फतेहगंज क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक गरीब परिवार की बिजली बिना किसी लिखित नोटिस के काट दी गई।

पीड़ित उपभोक्ता का आरोप है कि जब उन्होंने बिजली काटने का कारण पूछा तो मौके पर मौजूद लाइनमैन ने साफ शब्दों में कहा—

“ऊपर से आदेश है, अभी पैसा दो, नहीं तो लाइट नहीं आएगी।”

जब उपभोक्ता ने लिखित डिस्कनेक्शन नोटिस या उच्च अधिकारी का आदेश दिखाने को कहा, तो कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बावजूद उनकी बिजली काट दी गई।

❗ नियमों की खुलेआम अनदेखी

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। विद्युत नियमों के अनुसार:

बिना लिखित सूचना बिजली काटना अवैध है

बिजली काटने का अधिकार JE या SDO को होता है, लाइनमैन को नहीं

BPL उपभोक्ताओं को किस्त, OTS और सरकारी राहत योजनाओं का अधिकार है

इसके बावजूद गरीब उपभोक्ताओं को डराकर मौके पर ही नकद वसूली की जा रही है। मजबूरी में कई परिवार पैसा देने को विवश हो जाते हैं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और अधिकारों का हनन है।

⚡ नियम क्या कहते हैं

✔ बिना नोटिस बिजली नहीं काटी जा सकती

✔ लाइनमैन को निर्णय का अधिकार नहीं

✔ BPL उपभोक्ता को विशेष संरक्षण

✔ जबरन वसूली दंडनीय अपराध

🗣️ जनता के सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— 👉 क्या गरीब होना अपराध बन गया है?

👉 क्या “ऊपर से आदेश” कानून से बड़ा हो गया है?

👉 क्या बिजली विभाग ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई करेगा या आंख मूंदे रहेगा?

📢 प्रशासन से मांग

पीड़ित उपभोक्ता और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए

दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो

BPL उपभोक्ताओं को विभागीय मनमानी से राहत दी जाए

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