
मुख्य संपादक सीपी सरगम
- यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, फैसले के खिलाफ बड़ी बेंच जाएगी योगी सरकार;
लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर कानूनी और प्रशासनिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। 26 मई 2026 को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार और इलाहाबाद हाईकोर्ट के बीच कानूनी रस्साकशी तेज हो गई है। कोर्ट ने जहां सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों को ही दोबारा प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को ‘असंवैधानिक और कोर्ट की अवमानना’ करार दिया है, वहीं योगी सरकार इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की बड़ी पीठ (डिवीजन बेंच) में स्पेशल अपील दायर करने की तैयारी में है।
चुनाव टालना असंवैधानिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव समय पर न कराने की प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तय समय पर चुनाव न कराना संविधान की भावना के खिलाफ है। अदालत ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर पेश करे और चुनाव संपन्न कराने की पूरी समयसीमा (टाइमलाइन) अदालत के सामने रखे। इस मामले की अगली अहम सुनवाई 13 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे होगी।
कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील करेगी योगी सरकार
:कानूनी नियमों का हवाला: सरकार का तर्क है कि विशेष परिस्थितियों में पंचायतों का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए 6 महीने तक अंतरिम व्यवस्था (प्रशासक नियुक्ति) करने का कानूनी प्रावधान है।
ओबीसी सर्वे की मजबूरी: सरकार की दलील है कि वे चुनाव टालना नहीं चाहते, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ फॉर्मूले के तहत ओबीसी आयोग का सर्वे करा रहे हैं। बिना आरक्षण तय किए चुनाव कराने से पिछड़ों के हक का नुकसान होगा।
डिवीजन बेंच का रुख: सरकार सिंगल बेंच के इस फैसले से असहमत है और जल्द ही दो जजों की पीठ (डिवीजन बेंच) के सामने स्पेशल अपील दाखिल कर अपनी इस मजबूरी को स्पष्ट करेगी।
निर्वाचन आयोग तैयार, 12.58 करोड़ मतदाता करेंगे फैसला एक तरफ जहां कानूनी विवाद जारी है, वहीं राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने अपनी जमीनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
आयोग ने जून के इस महीने में पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) जारी कर दी है:
कुल मतदाता: इस बार रिकॉर्ड 12 करोड़ 58 लाख 51 हजार 570 लोग मतदान कर सकेंगे।9 अंकों का विशेष नंबर: फर्जी वोटिंग रोकने के लिए आयोग ने पहली बार हर वोटर को 9 अंकों का ‘स्टेट वोटर नंबर’ अलॉट किया है।आयोग का पक्ष: कोर्ट में सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने साफ किया कि वह चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन सरकार की तरफ से आरक्षण के नियम और जरूरी व्यवस्थाएं तय होने का इंतजार है।
गांवों के विकास कार्यों पर लगा ब्रेक
हाईकोर्ट के इस कड़े रुख और प्रशासकों की नियुक्ति पर सवाल उठने के बाद ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। ग्राम प्रधानों के प्रशासक के तौर पर काम करने पर संशय होने के कारण गांवों में नए विकास कार्यों की मंजूरियां अटक गई हैं। अब किसी भी नए काम के लिए जिलाधिकारियों (DM) की विशेष अनुमति की जरूरत पड़ रही है, जिससे ग्रामीण विकास की रफ्तार धीमी हो गई है।




