“गरीबों के हक़ पर डाका! छिंदवाड़ा में सीमेंट सोना बना — एक बोरी 1.92 लाख का, अफसर–नेताओं की जेबें लबालब!”*
“सरकारी लूट का नया रिकॉर्ड! छिंदवाड़ा में 1.92 लाख की सीमेंट — जनता पूछ रही है: ‘ये भवन बना या घोटाला?’”

*मध्य प्रदेश* छिंदवाड़ा में बन रहे सामुदायिक भवन के नाम पर ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी है। बिल में सिर्फ 3 बोरी सीमेंट की कीमत 5 लाख 4 हजार रुपये दिखा दी गई—यानि एक बोरी की कीमत 1.92 लाख रुपये!
यह किंवदंती नहीं, सरकारी भ्रष्टाचार का नया रिकॉर्ड है। जहाँ गरीब किसानों को वर्षों तक एक–एक रुपये का हिसाब देना पड़ता है, वहीं सरकार के आशीर्वाद से अफसर और ठेकेदार सीमेंट को सोने से भी महंगा बेच रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि उस गहरे भ्रष्टाचार की निशानी है जो सरकारी परियोजनाओं के नाम पर पनप रहा है। “विकास” के नाम पर जिस सामुदायिक भवन पर जनता का पैसा खर्च होना था, वहाँ केवल बिलों में ही विकास दिखाया जा रहा है—जमीन पर नहीं।
सरकारी खातों में फर्जी बिलों का खेल इतना खुल्लमखुल्ला है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी—तीनों शब्द सरकारी रिकॉर्ड में शायद छुट्टी पर चले गए हैं।
क्या यह महज संयोग है या सिस्टम की सड़ी हुई जड़ें?
क्या सच्चाई सामने आएगी या फाइलें धूल फांकती रहेंगी?
जनता पूछ रही है —
“कौन है इस सुनहरे सीमेंट का असली व्यापारी? अफसर या नेता?”
अब देखना यह है कि सरकार इस भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करती है या यह मामला भी बाकी घोटालों की तरह फाइलों के कब्रिस्तान में दफन हो जाएगा।




