बांदा कारीडाडी गांव में सड़क के लिए हाहाकार, मरीजों को चारपाई पर ढोना मजबूरी
250 की आबादी, डेढ़ किलोमीटर सड़क के इंतजार में सालों से परेशान ग्रामीण, आंदोलन की चेतावनी ---

बांदा के कारीडाडी गांव में सड़क की मांग: 250 की आबादी वाले गांव में मरीजों को चारपाई पर ले जाना पड़ता है, स्कूली बच्चों को भी परेशानी
बांदा जिले के तहसील अतर्रा अंतर्गत कारीडाडी से कुम्हारन पुरवा तक करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क नहीं है। इस कारण 250 की आबादी वाले इस पुरवा के लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क न होने से बच्चों को स्कूल जाने में मुश्किल होती है। बीमार लोगों को चारपाई पर उठाकर बाहर ले जाना पड़ता है। कोई वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। बरसात में स्थिति और खराब हो जाती है।
ग्रामीण कई सालों से इस समस्या से परेशान हैं। वे लगातार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इस बारे में बताते रहे हैं। 2024 में ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी भी दी थी। उस समय एसडीएम और अन्य अधिकारियों ने सड़क बनवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी सड़क का निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
समाजसेवी रवि शिवहरे का कहना है कि सरकार और प्रशासन को अपना वादा पूरा करना चाहिए। अगर जमीन विवाद है तो मुआवजा देकर समाधान निकालना चाहिए।
गांव की महिलाओं ने भी अपनी परेशानी बताई। मंजू देवी, पत्ती देवी और रोशनी ने कहा कि सड़क न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। बरसात में स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी। संजय प्रजापति, सुरेश, कालीचरण, बदलू और मेयादीन सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि अगर जल्द सड़क नहीं बनी तो वे आंदोलन करेंगे। साथ ही आने वाले चुनावों में फिर से बहिष्कार कर सकते हैं।




