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पितृपक्ष पर नदी-तालाबों में श्रद्धालुओं ने किया तर्पण, पूर्वजों को अर्पित की जलांजलि

बांदा में नवाब टैंक, केन नदी घाट व अन्य सरोवरों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पितृ तर्पण करते हुए मांगी पूर्वजों से आशीर्वाद। कुशा, तिल व चांदी-तांबे के पात्रों से किया गया पवित्र अनुष्ठान।

 

*पितृपक्ष नदी-तालाबों में तर्पण करने वालों की उमड़ी भीड़*

रिपोर्ट ब्यूरो प्रमुख बांदा

*बांदा* -कहते हैं कि जिनके सिर पर पितरों का हाथ नहीं होता, उन पर भगवान भी कृपा नहीं करते।
रविवार से पितृपक्ष आरंभ हो गया है। अपने पितरों को जलांजलि व तिलांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में केन नदी, नवाब टैंक समेत विभिन्न तालाबों में भीड़ लगी रही। लोगों ने संसार सागर से विदा ले चुके अपने पूर्वजों को याद करते हुए श्रद्धा के साथ तर्पण कर उनसे आशीर्वाद मांगा।

देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च, नमः स्वाहायै स्वधायै च नित्यमेव नमो नमः।
सनातन धर्म में पितरों को विशेष मान्यता प्रदान की गई है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी रामचरितमानस में लिखा है बाढ़हिं पुत्र पिता के धरमा।’ कहा जाता है कि जिसके पितर प्रसन्न रहते हैं, उस पर परमात्मा भी कृपा करते हैं। इसीलिए माता-पिता और वृद्धों की सेवा बताई गई है। वर्ष में एक पखवाड़ा पितरों के नाम किया गया है।

इन दिनों में वे लोग जिनके माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका होता है, वे उन्हें जलांजलि देते हैं। मान्यता है कि इन्हीं दिनों में दिया गया जल उन्हें प्राप्त होता है। तिथियों के अनुसार इन्हीं दिनों में श्राद्धकर्म भी होता है, जिसमें पितरों का पूरी श्रद्धा के साथ पूजन करने के बाद गाय, कुत्ता और कौओं का भाग निकाला जाता है। मान्यता है कि गाय देव रूप है और कौए को पितृ के समकक्ष दर्जा दिया जाता है।

जल देने का क्रम भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आरंभ हो जाता है और अमावस्या तक चलता है। देव ऋण और पितृ ऋण से उऋण होने का यही एक माध्यम है। पितृपक्ष आरंभ होने के साथ ही शुभ कार्यों पर पूरी तरह विराम लग गया। नई चीजों की खरीदारी बंद होने से बाजारों की रौनक खत्म हो गई। इस दौरान शादी-ब्याह, गृह प्रवेश, मुंडन से लेकर कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे।

ज्योतिषाचार्य पं. आनंद शास्त्री बताते हैं कि पितरों के तर्पण में कुशा व तिल का अनिवार्य प्रयोग करने से पितरों को दिया गया दान अक्षय फलदायी हो जाता है। चांदी व तांबे के पात्र पितरों को तारने वाले पात्र कहलाते हैं। श्राद्ध भोजन घर की दक्षिण दिशा में शांत अवस्था में कराने से पितर तृप्त होते हैं।

रविवार को शहर के नवाब टैंक और अन्य छोटे-बड़े सरोवरों समेत केन नदी के विभिन्न घाटों में पितरों को तर्पण करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही।

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