“हर घर बिजली” या “हर गली अंधेरा”? जरैला में फूंका ट्रांसफार्मर, योजनाओं की सच्चाई बेनकाब
“हर घर बिजली” का दावा फेल? जरैला एक महीने से अंधेरे में!

बांदा (जरैला गांव) से ग्राउंड रिपोर्ट
मंचों से गूंजते वादे, पोस्टरों पर चमकती योजनाएं और भाषणों में जगमगाता “हर घर बिजली” का सपना… लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत गांव-गांव रोशनी पहुंचाने का दावा किया गया था, मगर बांदा जिले के जरैला गांव में पिछले एक महीने से ट्रांसफार्मर फूंका पड़ा है और पूरा गांव अंधेरे में डूबा हुआ है।
एक महीना अंधेरा, जिम्मेदार खामोश
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बिल समय पर वसूला जाता है, लेकिन सुविधा के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलता है। दिन में घंटों कटौती और रात में आंख-मिचौली आम बात हो चुकी है। ट्रांसफार्मर खराब होने की सूचना विभाग को कई बार दी गई, लेकिन अब तक न मरम्मत हुई और न ही नया ट्रांसफार्मर लगाया गया।
किसान परेशान, बच्चों की पढ़ाई ठप
गांव के किसान सिंचाई के लिए मोटर नहीं चला पा रहे, जिससे फसलों पर संकट मंडरा रहा है। वहीं बच्चे लालटेन और मोबाइल की टॉर्च के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सवाल उठता है—जब हर बार ट्रांसफार्मर ही “शहीद” हो जाता है, तो योजना का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
क्या कागज़ों में ही चमक रही है बिजली?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब देखने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी जरैला की इस अंधेरी सच्चाई को कब रोशनी में बदलते हैं, या फिर “हर घर बिजली” सिर्फ भाषणों और कागज़ों में ही चमकती रहेगी।




