
बांदा। आज का दिन हमारे बांदा क्रिकेट के लिए गौरव का दिन रहा। क्रिकेट खिलाड़ी शाश्वत तिवारी जो हमारे बांदा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ0 सी0 एन0 तिवारी जी के नाती हैं और राजकुमार तिवारी जी जो आर्यावर्त बैंक से सेवानिवृत्ति हैं उनके पुत्र हैं।इन्होंने दुबई प्रीमियर लीग में कई मैच खेले और खेलने का गौरव हासिल किया इस उपलब्धि पर शाश्वत के कोच जितेंद्र यादव जो की वर्तमान समय में हमीरपुर स्टेडियम में है और इसके पहले बांदा में सेवा दे चुके हैं जितेंद्र यादव ने स्टेडियम में कोच रहकर ने कई सारे खिलाड़ी इस बांदा जनपद को दिए हैं जिसमें शोभा सिंह यू0पी0 महिला सीनियर टीम का हिस्सा हैं। वही आज शाश्वत तिवारी जिन्होंने अपने कोच से बालिंग का हुनर सीखा और आज इस मुकाम पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया कि यहां के बेसिक और यूएई के बेसिक में कोई अंतर नहीं है बराबर ही है बस थोड़ा सा डिफरेंटस जो है वह समझने का है। जब मेरा ट्रायल हुआ था वहां के सीनियर्स खिलाड़ियों ने बॉल फेंकने के लिए कहा उन्होने मेरी चार-पांच वालों को देखा मैं लेग ब्रेक बोलिंग का इस्तेमाल करता हूं मेरी बॉलिंग को देखकर वह मुझसे काफी इंप्रेस हुए यह बात मैंने अपने कोच जितेंद्र जी को भी बताई थी मुझे बहुत खुशी हुई कि उन्होंने मेरे पहले ही बोलिंग अट्रैक्शन में मुझे चुना और दुबई प्रीमियर लीग में खेलने का मौका दिया। मैने वहां अपना बेस्ट प्रदर्शन किया।अभी मेरे पास उत्तर प्रदेश लखनऊ से भी ऑफर आया हुआ है आप लोगों के आशीर्वाद से उम्मीद है कि मुझे लखनऊ में होने वाले T20 लीग में खेलने का अवसर मिले और मैं अपने बांदा जनपद का प्रदेश,देश में नाम रोशन कर सकूं।
आज डीसीए के अध्यक्ष चंद्रमौली भारद्वाज, पूर्व क्रिकेट कोच बांदा जितेंद्र यादव जीतू,बांदा वेटरेनस के सचिव प्रदीप गुप्ता, बांदा वेटरेनस के मीडिया प्रभारी सुनील सक्सेना,डीआर क्रिकेट अकादमी अकादमी के कोच राममिलन गुप्ता,बांदा वेटरेनस के कोषाध्यक्ष संदीप पिंटू,मोहित सिंह,शिवकुमार बड़कू सहित बांदा के खिलाड़ियों ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है और उनको आज मोमेंटो एवं बुके देकर सम्मानित किया है।
सभी उपस्थित जनों ने एक छोटी सी जगह से खेल स्टार्ट कर बांदा जनपद को गौरांवित करने का जो कार्य किया है हृदय से बधाई दी है और आगे आने वाले क्रिकेट टूर्नामेंटो में अच्छा प्रदर्शन करते हुए नेशनल तक खेले इसकी अग्रिम बधाई देते हुए ईश्वर से प्रार्थना।




