आयुक्त मंडल समिति का ऐतिहासिक फैसला : रजनी खटीक का जाति प्रमाण पत्र वैध घोषित
जिला स्तरीय समिति का आदेश निरस्त, खटीक समाज में खुशी की लहर – “यह सिर्फ मेरा नहीं, पूरे समाज का न्याय”

बदौसा(बाँदा)। आयुक्त चित्रकूटधाम मण्डल बाँदा की अध्यक्षता में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र विवाद से जुड़े प्रकरण में संयुक्त मंडलीय समिति ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाया, समिति ने 16 जून 2025 को जिला स्तरीय समिति द्वारा दिए गए आदेश को खारिज करते हुए अपीलकर्ता कु० रजनी खटिक का अनुसूचित जाति (खटीक) प्रमाण पत्र वैध माना है।
22 अगस्त 2025 को आयुक्त, चित्रकूटधाम मण्डल बाँदा की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई। इसमें उप निदेशक समाज कल्याण, चित्रकूटधाम मण्डल बाँदा, अपर जिलाधिकारी, बाँदा तथा अपर आयुक्त (प्रशासन) चित्रकूटधाम मण्डल बाँदा शामिल रहे।
बैठक में विस्तार से दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं, अभिलेखों की समीक्षा की गई और संबंधित रिपोर्टों पर विचार-विमर्श हुआ समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय दिया कि कुमारी रजनी खटीक का परिवार हिन्दू खटीक जाति से संबंधित है, जो अनुसूचित जाति में शामिल है।
पूर्व के प्रमाणपत्र, तहसीलदार अतर्रा की रिपोर्ट तथा गजट अधिसूचनाएँ इसे पुष्ट करती हैं। जिला स्तरीय समिति ने तथ्यों की गलत व्याख्या कर प्रमाण पत्र रद्द किया था।
इस आधार पर जिला समिति का 16 जून 2025 का आदेश निरस्त कर दिया गया।
इस निर्णय की सूचना कार्यालय उप निदेशक, समाज कल्याण, चित्रकूटधाम मण्डल, बाँदा द्वारा पत्रांक-497/उ०नि०स०क०/जा०प्र०पत्र/बैठक/2025-26, दिनांक 25 अगस्त 2025 को जारी की गई।
मंडलीय समिति के निर्णय के बाद खटीक समाज के लोगों में हर्ष की लहर दौड़ गई। स्थानीय स्तर पर मिठाइयाँ बाँटी गईं और इस आदेश को सामाजिक न्याय की जीत बताया गया।
बुंदेलखण्ड क्षेत्र में वर्षों से चल रहे हिन्दू चिकवा/चक बनाम मुस्लिम चिकवा (कस्साब) विवाद को भी यह फैसला स्पष्टता प्रदान करता है।
पूर्व प्रधान रजनी देवी खटीक ने कहा न्याय की जीत है। जिला स्तरीय समिति ने हमे तो मुस्लमान बना दिया था। कु० रजनी खटीक ने कहा – “यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जीत है। हमें न्याय मिला और अब भविष्य सुरक्षित है। रजनी के परिवार में खुशी की लहर है।




