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मध्य प्रदेश में बड़ा फर्जीवाड़ा: यूपी के निवासी ने बनाया एमपी का फर्जी SC सर्टिफिकेट, 1993 से कर रहा है शिक्षक की नौकरी

मध्य प्रदेश में बड़ा फर्जीवाड़ा: यूपी के निवासी ने बनाया एमपी का फर्जी SC सर्टिफिकेट, 1993 से कर रहा है शिक्षक की नौकरी

ब्यूरो रिपोर्ट 

सतना (मध्य प्रदेश)। सरकारी नौकरी हथियाने के लिए फर्जी निवास और जाति प्रमाण पत्र के इस्तेमाल का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह पूरा मामला और भी हैरान करने वाला इसलिए है क्योंकि इस महाघोटाले की पोल किसी और ने नहीं, बल्कि आरोपी के सगे भाई ने ही खोली है। उत्तर प्रदेश (UP) के चित्रकूट जिले के रहने वाले कामता प्रसाद ने अपने ही भाई पर मध्य प्रदेश (MP) का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर शिक्षक की नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगाया है।

ओबीसी से ‘अनुसूचित जाति’ बनने का खेल

चित्रकूट (यूपी) के बरवारा निवासी कामता प्रसाद पुत्र शंभूनाथ का आरोप है कि उनके भाई माहेश्वरी प्रसाद पुत्र शंभूनाथ ने वर्ष 1993 में मध्य प्रदेश के सतना जिले में फर्जी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षक के पद पर नियुक्ति पाई थी। कामता प्रसाद के अनुसार, वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और उनकी जाति ‘कुम्हार’ है। उत्तर प्रदेश के नियमों के मुताबिक कुम्हार जाति ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) के अंतर्गत आती है, जबकि मध्य प्रदेश में इस जाति को ‘अनुसूचित जाति’ (SC) का दर्जा प्राप्त है। इसी नियम का नाजायज फायदा उठाने के लिए माहेश्वरी प्रसाद ने मध्य प्रदेश का फर्जी निवास प्रमाण पत्र तैयार करवाया और खुद को अनुसूचित जाति (SC) का दर्शाते हुए आरक्षित कोटे से शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। आरोपी माहेश्वरी प्रसाद के सभी शैक्षणिक और पैतृक रिकॉर्ड आज भी उत्तर प्रदेश में ही दर्ज हैं।

प्रशासन मौन, RTI में भी रिकॉर्ड देने से इंकार

इस मामले को लेकर सतना जिला प्रशासन के रवैए पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता कामता प्रसाद का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े के संबंध में जिला अधिकारी (DM), सतना को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन लंबे समय के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासनिक उदासीनता यहीं नहीं रुकी; जब मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आरोपी शिक्षक माहेश्वरी प्रसाद के सेवा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की मांग की गई, तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने रिकॉर्ड छुपाने की नीयत से जानकारी देने से साफ मना कर दिया। इससे विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।

बर्खास्तगी और रिकवरी की उठ रही मांग

सगे भाई द्वारा मामला उजागर किए जाने के बाद अब आरोपी शिक्षक माहेश्वरी प्रसाद को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने और उसके खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता कामता प्रसाद का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। साथ ही, आरोपी शिक्षक द्वारा पिछले 33 वर्षों में सरकार से ली गई पूरी सैलरी की रिकवरी (वसूली) की जानी चाहिए ताकि फर्जीवाड़ा करने वालों को कड़ा सबक मिल सके

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