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भीषण गर्मी में बूंद-बूंद को तरसा अछरौंड़, एक सप्ताह में समाधान नहीं तो 01 जून से बड़ा आंदोलन

10 दिनों से ठप पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण नदी का दूषित पानी पीने को मजबूर — जिलाधिकारी से लगाई गुहार

*भीषण गर्मी में पेयजल संकट बना अभिशाप, जिलाधिकारी से लगाई गुहार — एक सप्ताह में समाधान न होने पर 01 जून से बड़े आंदोलन की चेतावनी*

 

**बांदा।** भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच तहसील सदर अंतर्गत ग्राम पंचायत अछरौंड़ इन दिनों गम्भीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। हालत इतने भयावह हो चुके हैं कि पिछले 10 दिनों से गांव में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। मजबूरी में ग्रामीण करीब दो किलोमीटर दूर नदी से दूषित पानी लाकर पीने को विवश हैं, जिससे गांव में उल्टी-दस्त समेत कई बीमारियां फैलने लगी हैं।

 

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी बांदा को प्रार्थना पत्र सौंपकर गांव की बदहाल पेयजल व्यवस्था से अवगत कराया और तत्काल स्थायी समाधान की मांग उठाई। ग्रामीणों का आरोप है कि जल विभाग की घोर लापरवाही और वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं के कारण आज पूरा गांव जल संकट की त्रासदी झेल रहा है।

 

ग्रामीणों में विमल कुमार द्विवेदी, घासीराम निषाद, रामदेव द्विवेदी, रामनारायण शुक्ला, दिनेश शुक्ला, संत कुमार मिश्रा,सुधीर द्विवेदी,ज्ञान सिंह सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि गांव में जल संस्थान भूरागढ़ एवं जल जीवन मिशन-नमामि गंगे योजना के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती है, किन्तु पिछले 10 दिनों से गांव में एक बूंद पानी तक नहीं पहुंचा है।

 

*”ग्रामीणों के अनुसार गांव की पूरी पेयजल व्यवस्था मुख्य रूप से रिंगबोर (नलकूप) पर निर्भर है। बोर से पानी की टंकी तक डाली गई प्लास्टिक पाइपलाइन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जो आए दिन जगह-जगह से फट जाती है। कर्मचारियों द्वारा अस्थायी मरम्मत के कुछ ही देर बाद पाइपलाइन पुनः टूट जाती है क्योंकि वह नलकूप के दबाव को सहन नहीं कर पाती।”*

 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पाइपलाइन बिछाने में भारी धांधली हुई थी। वर्ष 2022 में इसी समस्या को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन जलशक्ति राज्यमंत्री मा. रामकेश निषाद को भी अवगत कराया गया था। इसके बाद सर्किट हाउस बांदा में विभागीय अधिकारियों और ग्रामीणों की बैठक हुई थी, जिसमें तत्कालीन महाप्रबंधक पुरूषोत्तम यादव की मौजूदगी में जांच के बाद पाइपलाइन बदलने के आदेश दिए गए थे। लेकिन आज तक न तो जांच रिपोर्ट सामने आई और न ही पाइपलाइन बदली गई। परिणामस्वरूप गांव बार-बार भीषण जल संकट में फंस जाता है।

 

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत *”अछरौंड़ में हैंडपंप सफल नहीं हैं क्योंकि यहां खारा पानी निकलता है। अधिकांश कुएं सूखने की कगार पर हैं और पूरा गांव अब सिर्फ एक कुएं तथा नदी के दूषित पानी पर निर्भर हो गया है।”*

 

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि बोर से टंकी तक मजबूत लोहे की पाइपलाइन तत्काल डलवाई जाए, गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए तथा लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

इस दौरान आगे पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए *”ग्रामीणों ने बताया कि जिलाधिकारी अमित असेरी ने पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या सुनी तथा संबंधित विभाग से दो दिनों के भीतर रिपोर्ट तलब करने का आश्वासन दिया।”*

 

जिलाधिकारी कार्यालय से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता घासीराम निषाद ने कहा—

“यदि आने वाले एक सप्ताह के भीतर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो 01 जून 2026 दिन सोमवार को समस्त ग्रामीण महिलाएं, पुरुष, बच्चे-बच्चियां डिब्बा, बाल्टी और घड़े लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर तरीके से सम्बन्धित विभाग के लापरवाह विभाग के विरोध में शांतिपूर्ण धरना देने को मजबूर होंगे। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई और गांव की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी ।”

 

 

गांव में बढ़ते जल संकट और ग्रामीणों के उबलते आक्रोश ने अब प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। भीषण गर्मी के इस दौर में यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

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